Tuesday, 28 March 2017

वर्कर्स सोशलिस्ट पार्टी की अपील: मारुति मजदूरों पर राज्य-दमन का संगठित प्रतिरोध करो!

साथियो,

२०१२ में मारुति-सुजुकी की मानेसर स्थित फैक्ट्री में प्रबंधन द्वारा मजदूर यूनियन को तोड़ने के मकसद से उकसाए गए एक विवाद में पांच साल बाद ३१ मजदूरों को सज़ा दी गई है. यह विवाद, एक मजदूर जियालाल को सुपरवाइजर द्वारा गाली-गलौच से शुरू हुआ था, जिसका विरोध करने पर प्रबंधन ने भाड़े के बाउंसर बुलाकर मजदूरों पर हमला कराया था.

फर्जी आरोपों में १३ को उम्रकैद और १८ को कड़ी सजाएं दी गई हैं. जिन १३ को आजीवन कारावास मिला है उनमें १२ मजदूर यूनियन के पदाधिकारी हैं जो एक साल से प्रबंधन के विरुद्ध मजदूर संघर्ष का नेतृत्व कर रहे थे.

अदालत ने खुद यह माना कि फैक्ट्री में आग कैसे लगी इसका कोई प्रमाण नहीं है. अदालत ने यह भी माना कि पुलिस ने फैक्ट्री प्रबंधन से मिलकर मजदूरों को फंसाने के लिए झूठे साक्ष्य तैयार कर अदालत में प्रस्तुत किए. मगर प्रबंधन और पुलिस के खिलाफ कार्रवाई के बजाय, आरोपी मजदूरों को ही, मनमानी करते, अपने ही कानून की धज्जी उड़ाते, कड़ी सजा दे दीं. जिन ११७ मजदूरों को अदालत ने निर्दोष करार दिया वे भी कई साल जेल में काट चुके थे. साक्ष्य के अभाव में इन्हें बरी तो करना पड़ा मगर इसकी भरपाई शेष मज़दूरों को निर्मम सजाएं देकर की गई.

किसी भी साक्ष्य के अभाव के बावजूद, मजदूरों पर लाद दी गईं ये सख्त सजाएं, बुर्जुआ राज्य द्वारा मजदूरों के प्रति अन्याय, पक्षपात और मनमानी का जीवंत प्रमाण हैं जो संभ्रांत शासकों की नीयत और कॉर्पोरेट के साथ उनकी मिलीभगत का खुलासा करती हैं.

स्पष्ट है कि भारत को अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों का स्वर्ग बनाने को आतुर पूंजीवादी शासक, एक तरफ तो मजदूरों के बीच आतंक कायम करना चाहते हैं और दूसरी तरफ दुनिया भर में पूंजी-निवेशकों को यह सन्देश देना चाहते हैं कि मजदूरों का दमन करने में वे किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं.

मजदूरों के विरुद्ध, प्रबंधन, पुलिस, प्रशासन, सरकार, पार्टियां, कानून, अदालत सब एकजुट हैं. सब मिलकर मेहनतकश मजदूरों के शोषण, उत्पीड़न और दमन पर आमादा हैं. क्रूर दमन का यह सिलसिला, हरियाणा में सत्तासीन कांग्रेस पार्टी की तत्कालीन हुड्डा सरकार ने शुरू किया था और भाजपा की वर्तमान खट्टर सरकार ने इसे अंजाम तक पहुंचाया है.

साथियों! यह वर्गयुद्ध है! इस युद्ध में अपनी अन्तर्राष्ट्रीय वर्ग-शक्तियों को एकजुट करके ही मजदूर-वर्ग विजय हासिल कर सकता है.

लम्बे समय से झूठे ट्रेड-यूनियन नेताओं और रंग-बिरंगी पार्टियों ने हमें यह वर्ग-एकता हासिल करने और इसके आधार पर स्वतंत्र वर्ग-संघर्ष को आगे बढाने से रोके रखा है. ये फर्जी नेता और पार्टियां हमें अमीरों, संभ्रांतो की पक्षधर सरकारों से विनती करने, उनके अफसरों, नेताओं के आगे मिमियाने का झूठा रास्ता दिखाती रही हैं, जिससे कुछ हासिल नहीं है. हमें इस रास्ते को पूरी तरह ख़ारिज करते हुए इन फर्जी नेताओं, पार्टियों से सम्बन्ध तोड़ना होगा और वर्ग-संघर्ष का रास्ता पकड़ना होगा. 

साथियों! रास्ता यह है कि हम अपने वर्ग, मजदूर-वर्ग, की अन्तर्राष्ट्रीय कतारों को आवाज़ दें, उनसे मदद की अपील करें. उनसे कहें कि जब तक मारुति मजदूरों पर थोपा गया यह क्रूर फैसला ख़ारिज नहीं होता दुनिया की किसी भी बंदरगाह, तट या हवाई अड्डे पर, भारत को आने-जाने वाले माल को उतारा-चढ़ाया न जाए. इसके साथ ही तुरंत मानेसर से धारूहेड़ा और नीमराणा तक समूचे औद्योगिक क्षेत्र से एक ‘मजदूर परिषद्’ बुलाई जाय जिसमें हर फैक्ट्री से दो चुने हुए प्रतिनिधि हिस्सा लें. यह परिषद्, इस क्रूर और पक्षपातपूर्ण फैसले को रद्द करने की घोषणा करे और इसे लागू करने के लिए आम हड़ताल की तैयारी शुरू करे.

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वर्कर्स सोशलिस्ट पार्टी;  वेबसाइट: workersocialist.blogspot.com
संपर्क: 9810081383;  ई.मेल: worker.socialist1917@gmail.com 

Friday, 24 March 2017

More Than Ten Thousand Assemble to Protest the Malicious and Savage Convictions Imposed Upon 31 Maruti Workers

Our Correspondent/ 23.3.2017


Defying the ban order prohibiting any gathering of five or more, imposed by the police under section 144 of Criminal Procedure Code, more than Ten thousand workers gathered at Devi Lal Park at Manesar Gurgaon on Thursday evening.

The rally of the workers on March 23, was called to commemorate the martyr day of Bhagat Singh and his comrades, who were hanged by the British government in 1931 for their opposition to colonial rule, alongside the condemnation of Maruti convictions.

Thursday, 23 March 2017

Brutal Repression Upon Maruti-Suzuki Workers: An Appeal to the International Working Class!

Savage Onslaught Upon the Maruti Workers by the Capitalist State and its Hirelings, Must be Countered by the Working Class Through Mounting A Broad Class Offensive Internationally!



Comrade Workers,

It is crystal clear now that the 31 workers of Maruti-Suzuki at Manesar, Gurgaon, 60 kms from capital New Delhi, have been framed-up in false case, prosecuted and convicted without any trace of evidence to link them up with the crime.

Convicting the workers, the judge says that though none of the workers could be connected to the fire, yet it does not mean that they did not lit it. The prosecutor says that he demanded death penalty for the workers as the incident of 2012 is a scar that has to be wiped out in the backdrop of Modi’s ‘Make in India’ and receding FDI.

In the shocking judgement, the onus to prove themselves innocent has been shifted to the shoulders of the workers, applying the old French law, in derogation of all long settled principles of criminal jurisprudence and adjudication.

Tuesday, 21 March 2017

Maruti Struggle: Only an International Perspective May Lead to Victory!

- Rajesh Tyagi/ 21.3.2017

What cannot be termed anything except the travesty of justice, 13 of the Maruti Workers in Manesar plant of Maruti have been condemned to life imprisonment while 18 others for lesser terms inside the Jail.

The matter relates to a management provoked brawl inside the Manesar plant of Maruti, where a mercenary army of bouncers was let loose upon the workers after they raised their voice against physical abuse of the workers who dared to protest the sweatshop conditions inside the plant.

The sentences have been passed at the end of a show trial in which prosecution failed miserably to adduce any cogent evidence against any of the accused worker in support of its bald allegations of assault, rioting and arson.

Saturday, 18 March 2017

Brutal Class Justice Shows Its Teeth

13 of the Falsely Implicated Maruti Workers condemned for Life, Shorter Terms for 18 Others

- Rajesh Tyagi/ 20.3.2017


Out of the 31 Maruti-Suzuki workers, convicted last week by the Sessions Court at Gurgaon, Haryana, for various offences from rioting to murder, 13 have been condemned for life, 4 for 5 year and rest 14 for 3 years jail terms.

The 148 workers were charged for the offences in 2012 after a management provoked tussle between the workers and the managers inside the Maruti-Suzuki plant in Manesar on July 18 had entailed a fire in which part of the plant was gutted and the HR Manager of the company, Avanish Kumar Dev, got charred to death.

The workers had been agitating since a year for improvement in the sweatshop working conditions inside the Manesar plant, after sidelining a pro-management stooge union. Since then, the struggle of Maruti workers had become the spearhead of a broader workers’ struggle in the Manesar-Dharuhera Industrial belt that is manufacturing hub for major automakers. This struggle was emerging as a challenge not only to the multinational automaker giants but also to the trade unions whose job is to keep the workers under check and harness them to the vital needs of the industry and profits.

Saturday, 11 March 2017

All Sitting Governments Overturned in Assembly Polls in Five States in India

-Rajesh Tyagi/ 11.3.2017

In an expected move, the voters in India have overrun the sitting governments, irrespective of their party affiliations, in five states of Uttar Pradesh, Uttarakhand, Punjab, Goa and Manipur.

This overrun is the pinnacle of disenchantment of the masses from the series of right-wing bourgeois governments that have succeeded each other in power since 1947. The anti-incumbency trend is crystal clear and is the only explanation to reversal of all the five sitting governments.

Friday, 3 March 2017

ਹਿਟਲਰ ਸਤਾ 'ਚ ਕਿਵੇਂ ਪਹੁੰਚਿਆ?

-ਰਾਜੇਸ਼ ਤਿਆਗੀ/ 20 ਅਕਤੂਬਰ 2014  
ਅਨੁਵਾਦਕ ਰਜਿੰਦਰ

ਜਨਵਰੀ 1933 ' ਹਿਟਲਰ ਅਤੇ ਉਸਦੀ ਨਾਜ਼ੀ ਪਾਰਟੀ ਜਰਮਨੀ ' ਸੱਤਾ ' ਆਈ ਜਰਮਨੀ ' ਜਿੱਥੇ ਸੰਸਾਰ ਦੀ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਧ ਵਿਕਸਿਤ ਮਜ਼ਦੂਰ ਪਾਰਟੀਆਂ ਮੌਜੂਦ ਸਨ, ਜਿਨਾਂ ਕੋਲ ਨਾ ਸਿਰਫ਼ ਵਿਸ਼ਾਲ ਜਨਤਕ ਜਥੇਬੰਦੀਆਂ ਸਨ, ਸਗੋਂ ਵੱਡੀ ਗਿਣਤੀ ' ਹਥਿਆਰਬੰਦ ਦਸਤੇ ਵੀ ਸਨ, ਕਿਵੇਂ ਹਾਰ ਹੋਈ, ਇਸਨੂੰ ਸਮਝਣਾ ਨਵੀਂਆਂ ਪੀੜੀਆਂ ਲਈ, ਉਹਨਾਂ ਸਭ ਲਈ ਜਿਹੜੇ ਫਾਸੀਵਾਦ, ਪੂੰਜੀਵਾਦ ਵਿਰੁੱਧ ਸੰਘਰਸ਼ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹਨ ਬਹੁਤ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਹੈ

ਹਿਟਲਰ ਦਾ ਸੱਤਾ ' ਆਉਣਾ ਅਸਲ ' ਸਤਾਲਿਨ ਦੀ ਲੀਡਰਸ਼ੀਪ ਤਹਿਤ ਕੋਮਿੰਟਰਨ ਦੀਆਂ ਗ਼ਲਤ ਨੀਤੀਆਂ ਦਾ ਸਿੱਟਾ ਸੀ, ਇਹ ਨੀਤੀਆਂ ਪਿਛਲੇ ਇੱਕ ਦਹਾਕੇ ਤੋਂ ਜਾਰੀ ਸਨ