Thursday, 12 January 2017

ਵਿਧਾਨਸਭਾ ਚੋਣਾਂ ਦੇ ਨੇਡ਼ੇ ਆਉਂਦਿਆ ਹੀ, ਮੁਡ਼ ਸੁਣਾਈ ਦੇ ਰਹੀ ਹੈ SYL ਜਲ-ਵਿਵਾਦ ਦੀ ਗੂੰਜ

- ਰਾਜੇਸ਼ ਤਿਆਗੀ ਅਤੇ ਰਜਿੰਦਰ ਕੁਮਾਰ/ 08/01/2017

ਪੰਜਾਬ ' ਵਿਧਾਨ ਸਭਾ ਚੋਣਾਂ ਤੋਂ ਠੀਕ ਪਹਿਲਾਂ, ਆਮਤੌਰ 'ਤੇ SYL (ਸਤਲੁਜ ਯਮੁਨਾ ਲਿੰਕ) ਵਿਵਾਦ ਦੇ ਨਾਂ ਨਾਲ਼ ਜਾਣਿਆ ਜਾਣ ਵਾਲਾ, ਅੰਤਰ-ਪ੍ਰਦੇਸ਼ਿਕ ਪਾਣੀਆਂ ਦੇ ਵਿਵਾਦ ਦਾ ਪ੍ਰੇਤ, ਫਿਰ ਤੋਂ ਮੰਡਰਾ ਰਿਹਾ ਹੈ

ਲੰਮੇ ਸਮੇਂ ਤੋਂ ਚਲਦਾ ਰਿਹਾ SYL ਵਿਵਾਦ, ਪੰਜਾਬ ਅਤੇ ਹਰਿਆਣਾ, ਦੋ ਨਾਲ਼ ਲੱਗਦੇ ਜੌੜੇ ਸੂਬਿਆਂ ਦੁਆਰਾ, ਸਤਲੁਜ ਅਤੇ ਇਸਦੀਆਂ ਸਹਾਇਕ ਨਦੀਆਂ ਰਾਵੀ ਅਤੇ ਬਿਆਸ ਦੇ ਪੰਜਾਬ ' ਵੱਗਦੇ ਪਾਣੀ ਦੀ ਵੰਡ ਲਈ ਆਪਣੇ ਪਰਸਪਰ ਵਿਰੋਧੀ ਦਾਅਵਿਆਂ ਕਰਕੇ ਉੱਭਰਿਆ ਹੈ

ਦੋਨਾਂ ਰਾਜਾਂ ' 50 ਸਾਲ ਪੁਰਾਣੇ ਪਾਣੀਆਂ ਦੀ ਵੰਡ ਦੇ ਸਮਝੌਤੇ ਅਨੁਸਾਰ ਸਤਲੁਜ ਨੂੰ ਹਰਿਆਣਾ ਦੀ ਯਮੁਨਾ ਨਾਲ਼ 214 ਕਿਲੋਮੀਟਰ ਲੰਮੇ ਚੈਨਲ ਨਾਲ਼ ਜੋੜਿਆ ਜਾਣਾ ਸੀ, ਜੋ ਦੋਨੋਂ ਸੂਬਿਆਂ ਵਿੱਚੋਂ ਦੀ ਲੰਘਦੇ ਹੋਏ 122 ਕਿਲੋਮੀਟਰ ਪੰਜਾਬ ਅਤੇ 92 ਕਿਲੋਮੀਟਰ ਹਰਿਆਣਾ ' ਬਣਾਉਣਾ ਤੈਅ ਹੋਇਆਇਹ ਚੈਨਲ ਮੁੰਕਮਲ ਹੋ ਜਾਣ ਦੇ ਬਾਵਜੂਦ ਵੀ, ਪੰਜਾਬ ' ਇਸ ਪ੍ਰਾਜੈਕਟ ਦੇ ਛੋਟੇ ਜਿਹੇ ਹਿੱਸੇ ਦੀ ਉਸਾਰੀ ਦਾ ਕਾਰਜ, ਪੁੰਜੀਵਾਦੀ ਪਾਰਟੀਆਂ ਅਤੇ ਉਹਨਾਂ ਦੇ ਕ੍ਰਮਵਾਰ ਆਗੂਆਂ ਦੇ ਗੰਦੇ ਸਿਆਸੀ ਹੱਥਕੰਡਿਆਂ ਦੇ ਜਾਲ ' ਦਹਾਕਿਆਂ ਤੱਕ  ਫੱਸਿਆ ਰਿਹਾ

Sunday, 8 January 2017

As Assembly Polls Draw Close, the Reactionary Water War Makes it Again to Political Centre Stage in Punjab

-Rajesh Tyagi & Rajinder Kumar/ 8.1.2017

On the eve of the Assembly polls in Punjab, the specter of interstate water dispute, popularly known as SYL (Sutlej Yamuna Link) Dispute, is summoned to life again.

The long drawn SYL water dispute emerges out of the rival claims of the adjoining twin states of Punjab and Haryana, over water sharing from River Sutlej and its tributary rivers Ravi and Beas, flowing inside Punjab. Pursuant to a 50 years old water sharing agreement between the two states, Sutlej was to be linked to river Yamuna in Haryana, through 214 kms long water channel, 122 kms inside Punjab and 92 kms in Haryana, cutting through the two states. Almost complete otherwise, the construction of a small part of the channel inside Punjab, remains for decades, mired into the cobweb of dirty political maneuvers of bourgeois parties and their respective leaders.

Thursday, 15 December 2016

Demonetization is Nothing but Deliberate, Calculated, Regulated, Destruction of the Productive Forces

Rajesh Tyagi/ 15.12.2016

Economists both on the right and the left have attempted to decode and explain demonetization. Those on the right have conceived and explained it in terms of its avowed objectives that are almost farcical, while those on the left have failed to look beyond the conspiracy theories, which in no way explain demonetization.

Suddenly, but with great fanfare the right-wing government under Narendra Modi announced that the currency notes of Rs.1000 and 500 denomination would cease to be legal tender with immediate effect. In a live telecast, in the evening of November 8, the Prime Minister himself announced that the purpose of demonetization was to push out the ‘black’ money from circulation, as well to pull it out from hidden stacks.

Friday, 9 December 2016

कास्त्रो का निधन और इतिहास के अनिवार्य सबक

- राजेश त्यागी/ २.१२.२०१६    
(राजिंदर द्वारा मूल अंग्रेजी से अनुवादित)

कास्त्रो 90 साल की उम्र चल बसे और हमारे लिए एक विरासत और अत्यंत महत्वपूर्ण सबक छोड़ गये हैं, जो उससे सीखे जाने चाहिएं।

अमेरिका सहित पूरी दुनिया में अमीरों और अभिजातों ने कास्त्रो की मौत का जश्न मनाया। उनकी समझ के मुताबिक, कास्त्रो की मौत, अमेरिकी महाद्वीप में निर्मम तानाशाही, जो अमेरिका के वर्चस्व के लिए चुनौती और पूंजीवादी रास्ते के नकार पर आधारित वैकल्पिक विकास का एक रास्ता समझी जाती थी, के एक दौर के अंत की द्योतक है। उन्होंने उसकी मौत का ‘लाल राक्षस’ से मुक्ति के रूप में स्वागत किया।

कास्त्रो के समर्थकों ने उसकी मौत को जनवाद और समाजवाद के एक सैनिक की शहादत कहा जिसने बतिस्ता हकूमत के खिलाफ़ अपने साहसपूर्ण संघर्ष के ज़रिये 'समाजवाद के लिए नई राह' को प्रशस्त किया और क्यूबा को साम्राज्यवाद के चंगुल से छुड़ाया।

Friday, 2 December 2016

The Demise of Castro and the Lessons from History

Rajesh Tyagi/ 2.12.2016

Castro died at the age of 90, leaving behind a legacy and very important lessons to be learnt from it.

Sections of the rich and elite in the US and the world over rejoiced over and celebrated his death. To their understanding, death of Castro symbolizes the end of an era of brutal dictatorship, marked by a challenge to US hegemony on American continent and an alternative path of development based on rejection of the capitalist road. They hailed his death for good riddance from the red monster.

Castro’s supporters, however, mourned his demise as the end of a martyr who opened up a ‘new road to socialism’ through his dare-devil struggle against Batista regime and liberated Cuba from the shackles of imperialist domination.

At the outset, marxist revolutionaries, must reject the venomous propaganda against Castro, motivated as it is by the deep-rooted imperialist malice, vile prejudices and political ill-will against the Cuban revolution, by those who had all through supported bloody, predatory dictatorships everywhere in the world including in Latin Americas. 

The ruthlessness, of which Castro is accused repeatedly by the imperialist bigots, was the most legitimate answer of the revolution to the unlimited reactionary savagery perpetuated and forced on Cuban workers and toilers by the imperialist butchers and their client regimes in Cuba for decades before and after the revolution. 

Sunday, 27 November 2016

वर्कर्स सोशलिस्ट पार्टी का आह्वान

२८ नवम्बर के एक दिवसीय भारत-बंद के पाखण्ड को
निर्णायक संघर्ष की ओर मोड़ो!

साथियो,

८ नवम्बर को भारत की पूंजीवादी-फासीवादी सरकार ने नोटबंदी की घोषणा करके, मेहनतकश और गरीब जनता को बदहाली के मुंह में धकेल दिया है. काम-धंधे, रोजगार सब चौपट कर दिए गए हैं. पूरी नीति को इस तरह तैयार और लागू किया गया है कि उसका सारा बोझ गरीब, मेहनतकश जनता के ऊपर पड़ा है और इसका सारा लाभ बड़े बैंक और बैंकर समेट रहे हैं.

भगवा सरकार के इस कदम के खिलाफ, पहले ही दिन से, जनता में जबरदस्त आक्रोश फैला हुआ था. मगर विपक्ष की पार्टियों ने, खासतौर से झूठे वामियों, स्तालिनवादियों ने, इस आक्रोश को बड़ी चालाकी से ठंडा हो जाने दिया. उन्होंने जानबूझकर नोटबंदी के खिलाफ प्रतिरोध को संसद में दोगली और खोखली बहसों तक सीमित रखते हुए उफ़ान को उतर जाने दिया. अब अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को दिखावे भर के लिए ये पार्टियां एक दिन के भारत बंद का आयोजन कर रही हैं. इस बेदम प्रतिरोध को एक दिन तक सीमित रखने की घोषणा करके छद्म वामियों ने अपनी नीयत साफ़ कर दी है कि उनका उद्देश्य पूंजीवाद के विरुद्ध कोई कारगर संघर्ष करना या उसे नुकसान पहुंचाना नहीं है, बल्कि वे सिर्फ विरोध की नौटंकी भर कर रहे हैं.

Saturday, 19 November 2016

वर्कर्स सोशलिस्ट पार्टी की अपील

‘रेड हंड्रेड’ संगठित करो!
फासीवाद के विरुद्ध ‘संयुक्त मोर्चा’ बनाओ !


एक के बाद दूसरी पूंजीवादी पार्टियों के, दशकों से चले आए भ्रष्ट कुशासन का लाभ उठाकर, अंततः फासिस्ट भाजपा सत्ता में आ गई. आकंठ, आर्थिक और राजनीतिक संकट में डूबे पूंजीपतियों ने फासीवाद के सामने समर्पण कर दिया है.

फासीवाद उभार पर है!  इसके उभार ने, सामाजिक और राजनीतिक जीवन के तमाम पहलुओं के लिए खतरा पैदा कर दिया है. इसकी हिट-लिस्ट में शामिल हैं- मजदूर, मेहनतकश, गरीब और वंचित.

फासिस्ट, बड़े कॉर्पोरेट के आतंकी कारिंदों और अमीरों, संभ्रांतों द्वारा प्रायोजित हिंसक आन्दोलन के सिवा कुछ नहीं हैं. पूंजीवाद एक बार फिर अपने बर्बर और पाशविक दांत दिखा रहा है. एक समूची सदी का क्रान्तिकारी अनुभव हमें निर्णायक रूप से दिखाता है कि फासीवाद से विवाद व्यर्थ है, उसे कुचलना ही होगा.